मुरावा ग्राम पंचायत में मनरेगा पर सवाल: मजदूरों की हाजिरी कागजों में, काम ठेके पर

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मुरावा ग्राम पंचायत में मनरेगा पर सवाल: मजदूरों की हाजिरी कागजों में, काम ठेके पर

लखीमपुर खीरी जिले की धौरहरा तहसील के ईसानगर ब्लॉक अंतर्गत मुरावा ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्यों को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां मनरेगा योजना के तहत बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हो रही हैं।

ग्रामीणों की शिकायत पर जब मीडिया टीम ने मौके का निरीक्षण किया तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार जहां दर्जनों मजदूरों की उपस्थिति दिखाई जा रही थी, वहीं वास्तविकता में केवल एक मजदूर ही काम करता मिला।

भूमि विकास कार्य में गड़बड़ी का आरोप

ग्राम पंचायत मुरावा में “भंडारी के खेत से बिहारी के खेत तक भूमि विकास कार्य” कराया जा रहा है। यह कार्य मनरेगा योजना के अंतर्गत स्वीकृत बताया जा रहा है।

मनरेगा का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना और गांवों में विकास कार्यों को बढ़ावा देना है। लेकिन इस योजना के क्रियान्वयन में कई बार गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आती रही हैं।

मुरावा ग्राम पंचायत में भी कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है।

मास्टर रोल में 23 मजदूर, जमीन पर सिर्फ एक

मीडिया टीम ने जब कार्य स्थल का निरीक्षण किया तो पाया कि वहां केवल एक बुजुर्ग मजदूर मिट्टी का काम करता हुआ दिखाई दिया।

जबकि मनरेगा के मास्टर रोल में 23 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज बताई जा रही थी। इस अंतर ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मजदूर ने खोली पोल

मौके पर काम कर रहे बुजुर्ग मजदूर ने बताया कि उसे ठेके पर काम दिया गया है। उसे लगभग 250 रुपये में एक पटान बनाने का काम मिला है।

मनरेगा योजना में ठेकेदारों की भूमिका पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद यदि ठेके पर काम कराया जा रहा है तो यह नियमों का सीधा उल्लंघन माना जाएगा।

ग्रामीणों का आरोप – फोटो के लिए बुलाए जाते हैं मजदूर

ग्राम पंचायत के कुछ लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई बार मजदूरों को केवल फोटो खिंचवाने के लिए बुलाया जाता है।

इसके बाद काम ठेकेदारों से कराया जाता है। इससे कागजों में मजदूरों की उपस्थिति दर्ज हो जाती है और भुगतान भी दिखा दिया जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि कई मजदूरों को पूरा भुगतान भी नहीं मिलता।

पोर्टल और जमीन की हकीकत में अंतर

मनरेगा पोर्टल पर 27 फरवरी से मजदूरों की उपस्थिति दर्ज दिखाई दे रही है। लेकिन जब मीडिया टीम ने मौके का निरीक्षण किया तो वहां मजदूरों की संख्या रिकॉर्ड से बिल्कुल अलग नजर आई।

यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।

अधिकारियों से मांगा गया जवाब

मीडिया टीम ने ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन दोनों ने इस मामले में कोई जवाब नहीं दिया।

इसके बाद ईसानगर ब्लॉक के बीडीओ धन प्राप्त यादव से संपर्क कर मामले की जानकारी दी गई।

जांच का आश्वासन

बीडीओ ने कहा कि यदि शिकायत सही पाई जाती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि मनरेगा योजना में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कार्रवाई का इंतजार

फिलहाल इस पूरे मामले में प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।

ग्रामीणों को उम्मीद है कि यदि निष्पक्ष जांच होती है तो मनरेगा योजना में हो रही अनियमितताओं का सच सामने आएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

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