इंकलाब का नारा गूंजा, लखीमपुर में शहीद भगत सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि
शहीद दिवस के अवसर पर पूरे देश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में भी शहीद-ए-आजम Bhagat Singh को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस मौके पर “शहीद भगत सिंह निस्वार्थ सेवा समिति” के तत्वावधान में एक भव्य और भावनात्मक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका नेतृत्व समाजसेवी जसपाल सिंह पाली ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी देखने को मिली, जिसमें युवा, बुजुर्ग और महिलाएं सभी शामिल रहे। पूरे आयोजन स्थल पर देशभक्ति का माहौल छाया रहा और “इंकलाब जिंदाबाद” के नारों से वातावरण गूंज उठा।

कार्यक्रम की शुरुआत शहीद भगत सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर की गई। उपस्थित लोगों ने कतारबद्ध होकर अपने प्रिय क्रांतिकारी को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस दौरान कई लोगों की आंखें नम हो गईं और माहौल भावुक हो उठा। कार्यक्रम की सबसे विशेष बात यह रही कि भगत सिंह की चरण पादुका हरदोई से लाकर यहां स्थापित की गईं। इन चरण पादुकाओं के दर्शन के लिए लोगों में खास उत्साह देखने को मिला। दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने इन्हें नमन किया और अपने आपको गौरवान्वित महसूस किया।

इस अवसर पर वक्ताओं ने अपने संबोधन में भगत सिंह के जीवन, संघर्ष और विचारों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भगत सिंह केवल एक साहसी क्रांतिकारी ही नहीं थे, बल्कि एक प्रखर विचारक, लेखक और दूरदर्शी भी थे। उन्होंने देश की आजादी के लिए जिस निडरता और समर्पण के साथ कार्य किया, वह आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है। वक्ताओं ने कहा कि भगत सिंह का सपना एक ऐसे भारत का था, जहां समानता, न्याय और स्वतंत्रता का बोलबाला हो, और किसी भी प्रकार का शोषण न हो।
मीडिया से बातचीत करते हुए कार्यक्रम के आयोजक जसपाल सिंह पाली ने सरकार से मांग की कि भगत सिंह को औपचारिक रूप से ‘शहीद’ का दर्जा दिया जाए और उनके नाम पर विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाएं शुरू की जाएं। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को भगत सिंह के विचारों और उनके बलिदान के बारे में सही जानकारी मिलनी चाहिए, ताकि उनमें देशभक्ति की भावना और मजबूत हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल श्रद्धांजलि देना ही नहीं, बल्कि युवाओं को जागरूक और प्रेरित करना भी है।
कार्यक्रम में शामिल युवाओं ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भगत सिंह का जीवन उन्हें देश के लिए कुछ कर गुजरने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि आज जरूरत है कि हम उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारें और समाज के लिए सकारात्मक योगदान दें। वहीं बुजुर्गों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि भगत सिंह जैसे वीर सपूतों के बलिदान के कारण ही आज हम स्वतंत्र भारत में सांस ले पा रहे हैं।

कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। पूरा आयोजन देशभक्ति, सम्मान और गर्व की भावना से ओत-प्रोत रहा।
लखीमपुर में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल एक श्रद्धांजलि समारोह था, बल्कि यह देशभक्ति और जागरूकता का एक सशक्त संदेश भी था। इस आयोजन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि भले ही समय बदल जाए, लेकिन शहीदों के प्रति सम्मान और उनके विचारों की प्रासंगिकता कभी कम नहीं होती। भगत सिंह का बलिदान और उनका “इंकलाब जिंदाबाद” का नारा आज भी हर भारतीय के दिल में जिंदा है और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
